Vajroli Mudra

          Vajroli Mudra:- हठयोग की क्रियाओं में एक वज्रोली क्रिया भी है; उनमें मूत्रमार्ग से जल ऊपर खींचकर फिर बाहर निकाला जाता है। इस प्रकार उस मार्ग की शुद्धि हो जाती है। इसी प्रकार किसी टब में बैठकर मलमार्ग द्वारा भी पानी खींचा जाता है। थोड़ी देर पेट में रखकर उसे … Read more

Urdhagaman Vajroli Mudra

Urdhagaman Vajroli Mudra धरामवष्टभ्य करयोस्तलाभ्याम् ऊर्ध्वं क्षिवेत्पादयुगंशिरः खे। शक्तिप्रबोधाय चिरजीवनाय वज्रालिमुद्रां कलयो वदन्ति ॥४५॥ अयं योगो योगश्रेष्ठो योगिनां मुक्तिकारणम्। अयंहितप्रदोयोगो योगिनां सिद्धिदायकः ॥४६॥ एतद्योगप्रसादेन बिन्दुसिद्धिर्भवेद्ध्रवम्। सिद्धे बिन्दौ महायत्ने किं न सिद्ध्यतिभूतले ॥४७॥ भोगेन महता युक्तो यदि मुद्रां समाचरेत्। तथापि सकला सिद्धिस्तस्य भवति निश्चितम् ॥४८॥ प्रथम विधि : किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाएँ | … Read more

sahajoli Mudra

सहजोली मुद्रा:-   सहजोलीश्चामरोलीर्वज्रोल्या एव भेदत: । जले सुभस्म निक्षिप्य दग्धगोमयसम्भवम् ।। 92 ।। वज्रोली मैथुनादूर्ध्वं स्त्रीपुंसो: स्वाङ्गले पनम् । आसीनयो: सुखेनैव मुक्तव्यापारयो: क्षणात् ।। 93 ।। भावार्थ :- सहजोली व अमरोली वज्रोली मुद्रा के ही दो प्रकार हैं । इनमें सहजोली क्रिया को बताते हुए कहा है कि योगी साधक अथवा साधिका दोनों ही वज्रोली … Read more

Amroli Mudra

अमरोली मुद्रा  वर्णन   पित्तोल्वणत्वात्प्रथमाम्बुधारां विहाय निस्सारतयान्त्यधाराम् । निषेव्यते शीतलमध्यधारा कापालिके खण्डमतेऽमरोली ।। 96 ।। अमरीं य: पिबेन्नित्यं नस्यं कुर्वन् दिने दिने । वज्रोलीमभ्यसेत् सम्यगमरोलीति कथ्यते ।। 97 ।।   भावार्थ :- मूत्र विसर्जन ( मूत्र त्याग ) के समय मूत्र की पहली धार जिसमें पित्त की मात्रा अधिक होती है व आखिरी धार जो सार … Read more